विवरण
औद्योगिक और डिजिटल (पुनः)क्रांति से मानवता जितनी आगे बढ़ती है, उसकी सीमाएँ उतनी ही स्पष्ट होती जाती हैं। हम अभूतपूर्व असमानताएँ, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में गिरावट, कम होती खुशी और प्राकृतिक संसाधनों पर व्यवस्थित हिंसा में वृद्धि देख रहे हैं। ऐसे कठिन समय में, एक अधिक न्यायपूर्ण समाज, अधिक खुशहाल और जागरूक जीवन और एक स्वस्थ ग्रह की आवश्यकता उभर रही है।





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